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Principal's Message

 

 

संदेश

मनुष्य ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति है। अपने एवं अपने परिवेश के विकास की अपार संभावनाएं, उसके भीतर बसी हुई हैं। शिक्षा बच्चों के भीतर की छिपी इन्हीं प्रतिभाओं एवं क्षमताओं को पहचानती एवं विकसित करती है।

शरीर तंदरुस्त हो,

दिमाग खूब चुस्त हो,

और दिल दुरुस्त हो।

ये तीन पंक्तियाँ शिक्षा के मूल उद्देश्य को स्पष्ट करती हैं। ऐंद्रिय, बौद्धिक तथा भावनात्मक विकास में संतुलन स्थापित कर विकास के पथ पर बच्चों को आगे बढ़ाने के इसी लक्ष्य का संधान करने में केन्द्रीय विद्यालय संगठन पूरे भारत में अनिवर्चनीय भूमिका निभा रहा है। प्रकृति की गोद में, महानगरों के कोलाहल व प्रदूषण से दूर स्थित केंद्रीय विद्यालय लेखापानी के शांत एवं सुरम्य वातावरण में मेधावी, प्रतिभासंपन्न और परिश्रमी छात्रों, ऊर्जा व उत्साह से परिपूर्ण विद्वान अध्यापक साथियों तथा उद्यमी अभिभावकों के सम्मिलित प्रयासों से केन्द्रीय विद्यालय लेखापानी को उन्नति व प्रगति के नए आयामों तक पहुंचाने के कामनाओं के साथ।

डॉ. पालीशाह

प्राचार्य

केन्द्रीय विद्यालय लेखापानी